ईश्वर कोई प्राप्त करने की वस्तु नही है :-

एक बात तो तय है किसी भी प्राप्त करने योग्य वास्तु का अथक प्रयास करने से वो वस्तु जरूर प्राप्त हो जाती है जैसे अगर कोई धन की कामना से अथक प्रयास करता है तो कुछ समय पर्यन्त वो धनिक बन जाता है यहाँ अथक प्रयास से मतलब है जिसमे येनकेन प्रकारेण, उसी तरह यदि कोई ईश्वर को प्राप्त करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन दांव पे लगा दे तो वो स्वयं ईश्वर बन जाता है और पूजनीय बन जाता है : जो भी करो वो सम्पूर्णता से करो ....आधे अधूरे मन से किया काम की सफलता भी आधी अधूरी मिलती है ...हरी ॐ

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